What are some tips to reduce the risk of COVID-19? | SCI IVF Hospital Team Presentation

What are some tips to reduce the risk of COVID-19? | SCI IVF Hospital Team Presentation

Presentation from SCI IVF Hospital on Reopening post lockdown safeguarding your health.
Watch the video here: https://www.youtube.com/watch?v=uTFafire_Hs

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How to Prepare for the In Vitro Fertilization Process

Fertility problems are very common among the couples that prevent them from conceiving a baby naturally. With the advancement of technology, many methods came out to help with the pregnancy and parenthood. Among all of the methods, IVF is one of the most chosen and common for fertility treatments.

You can visit the IVF treatment center in Noida to do this treatment successfully at a low cost. But before this treatment, you need to be prepared both mentally and physically. It will help to increase the success rate of pregnancy through IVF treatment. Here are some of the ways that will help you to prepare successfully.

Physical Preparation

While thinking about participating in the IVF process, you need to prepare physically. While it helps to complete the dream of getting a happy family, it contains a long process. If you are not physically fit, then it might be hard for you to go through the process. So, it is better to get prepared for a long before the treatment. First, you need to know about the date of this treatment and start preparing accordingly. It also greatly affects the production of mature eggs and quality. You can do some exercises to keep the health conditions and weight in check. Choose low impact exercises that you can continue doing after the process. Contact Dr Shivani Sachdev Gour to know more about the preparation for IVF.

Another very common question asked by women is if they can continue exercise in the time of treatment. While most of the women are advised to rest and not leave the bed, you can exercise during the treatment. But, you will need to keep it very limited to prevent any harm. Avoid any high-stress exercise, do not continue exercises in certain stages, make sure to not exercise more than 5 hours every week, do low impact exercises.

Mental Preparation

This is the most important preparation before the treatment. All the couples or parents that seek IVF are going from a bad mental situation as they are unable to conceive a baby naturally. Also, most of them have tried other treatment procedures before IVF and did not work. So, having a strong mental preparation is very important for the treatment. No matter if you have failed before in other treatments, you need to be strong mentally. You can visit the SCI IVF clinic to start your IVF treatment today.

Not only you, but your partner also needs to be mentally ready for the treatment as the result can be negative.  Also, the daily injections and other medications can be stressful along with the long period of treatment. So, before starting the treatment, you need to discuss it very carefully with your partner and then proceed. If the results are negative, then you can again try for the process and most of the time it takes more than one time to get successful with the process. You can do IVF treatment by Dr. Shivani Gour to increase the chance of success.

These are the preparations that you must have before choosing the In Vitro Fertilization process. Visit here to read Dr Shivani Sachdev Gour Reviews

What Should Be the Age of Marriage for Girls, Know the Experts View?

मौजूदा समय में भारतीय कानून के मुताबिक, लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल और लड़कों की शादी की उम्र 21 साल है। ऐसा इसलिए क्योंकि समाज का एक बड़ा तबका मानता है कि लड़कियां जल्दी मैच्योर हो जाती हैं, इसलिए दुलहन को दूल्हे से कम उम्र की होना चाहिए। साथ ही यह भी कहा जाता है कि चूंकि हमारे यहां पितृसत्तात्मक समाज है, तो पति के उम्र में बड़े होने पर पत्नी को उसकी बात मानने पर उसके आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंचती। लेकिन तमाम सामाजिक कार्यकर्ता और डॉक्टर समयसमय पर लड़कियों की शादी की उम्र पर पुनर्विचार की जरूरत बताते रहते हैं। इस बार बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस मसले पर अपनी बात रखी। बजट 2020-21 को संसद में पेश करने के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक टास्क फोर्स बनाने का प्रस्ताव दिया है, जो लड़कियों की शादी की उम्र पर विचार करेगी और छह महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, ‘साल 1929 के बाद शारदा अधिनियम में संशोधन करते हुए 1978 में महिलाओं के विवाह की आयु सीमा बढ़ाकर 15 से बढ़ाकर 18 साल की गई थी। जैसेजैसे भारत आगे बढ़ रहा है, वैसेवैसे महिलाओं के लिए शिक्षा और करियर में आगे बढ़ने के अवसर भी बन रहे हैं। महिला मृत्युदर में कमी लाना और पोषण के स्तरों में सुधार लाना जरूरी है। मां बनने वाली लड़की की उम्र से जुड़े पूरे मुद्दे को इस नजरिए ये साथ देखना जरूरी है। मैं एक टास्क फोर्स नियुक्त करने का प्रस्ताव देती हूं, जो छह महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।इसके बाद से इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि लड़की की शादी की उम्र कितनी होनी चाहिए।

दोनों की समान उम्र के हैं कई फायदे

सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की डायरेक्टर डॉक्टर रंजना कुमारी ने लड़कियों की शादी की उम्र पर पुनर्विचार के लिए कोर्ट में याचिका डाली है। इस मसले पर पर बात करने पर वह कहती हैं, ‘हम लोगों ने कोर्ट में इस बारे में याचिका डाली थी, जिसकी कॉपी हमने उनके (वित्त मंत्री) पास भी भेजी। हम लोगों ने इस याचिका में कहा है कि लड़की की शादी की उम्र 18 साल और लड़के की उम्र 21 साल रहने का कोई कारण नहीं है। कई लोग मानते हैं कि लड़की जल्दी मैच्योर हो जाती है, जबकि लड़का देर से मैच्योर होता है। लेकिन ये चीजें वैज्ञानिक आधार पर साबित नहीं हैं। यह एक तरह की सामाजिक धारणा है। यह भी जरूरी नहीं है कि लड़की छोटी ही हो। दुनियाभर में ऐसे तमाम विवाह हो रहे हैं, जिनमें लड़कियां बड़ी हैं। खासतौर से पश्चिमी देशों में तो 90 प्रतिशत शादियों में लड़कियां बड़ी होती हैं। हमारे यहां भी इन चीजों को बदलना चाहिए। मगर लड़के की उम्र कम करने का सवाल ही नहीं है, तो हमारी मांग यह है कि दोनों की उम्र 21 साल होनी चाहिए। अगर दोनों कमाने लायक हो जाएंगे, तो आर्थिक स्थिति भी अच्छी होगी और अर्थव्यवस्था भी। उम्र बढ़ने से लड़की के पास समय होगा पूरी पढ़ाई करने का। अमूमन 21 साल तक बच्ची ग्रेजुएट हो जाएगी, फिर नौकरी करने के अवसर भी मिलेंगे। उम्र बढ़ जाएगी, तो वह शिक्षित और हेल्दी होंगी।वहीं लड़कियों के स्वास्थ्य के नजरिए से रंजना कहती हैं, ‘लड़की की शादी की उम्र बढ़ाने का फायदा यह भी होगा कि बच्चों का लालनपालन कम उम्र की लड़कियां कर नहीं पाती हैं और इस वजह से हमारी शिशु मृत्यु दर ज्यादा है। अपरिपक्व (इम्मैच्योर) शरीर से बच्चा इतना मजबूत नहीं पैदा होता। तो नैचुरली बच्चे की हेल्थ का भी एक पहलू है कि वह स्वस्थ नहीं रहता है।

शादी के लिए 21 साल की उम्र सही

शादी के बाद जहां लड़की को अपने ससुराल और पति की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। वहीं एक बच्चे को जन्म देकर उसका पालन पोषण भी करना होता है। ऐसे में डॉक्टरों का मानना है कि लड़की के लिए 21 साल के बाद स्वस्थ रूप से गर्भ धारण करने की उम्र होती है। इस बारे में एससीआई हेल्थकेयर की डायरेक्टर और गाइनिकॉलजिस्ट डॉ. शिवानी सचदेव गौड़ कहती हैं, ‘पॉपुलेशन काउंसिल के एक सर्वे के मुताबिक 15 से 19 साल के बीच में 30 प्रतिशत लड़कियों की शादी हो जाती है। लेकिन मां बनने के लिए 20-21 साल के बाद की उम्र ही ठीक होती है, क्योंकि लड़कियों का पेल्विस 18 की उम्र के बाद ही पूरा विकसित होता है और 21 तक उसका पूरा विकास होता है। तो मां बनने के लिए कम से कम 22-23 साल की उम्र तो होनी चाहिए।शादी और हार्मोनल विकास पर वह कहती हैं, ’18-19 तक हार्मोंस का विकास तो हो जाता है, लेकिन कई लड़कियां शादी के तुरंत बाद मां भी तो बन जाती हैं, जिसके लिए उम्र बिल्कुल ठीक नहीं है।क्या 18-19 साल की उम्र में मां बनने से लड़कियों की सेहत पर कोई प्रभाव पड़ता है? इसके जवाब में वह कहती हैं, ‘हां, इससे सबसे पहले तो काफी गंभीर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है, जिसे प्री एक्लेम्सिया कहते हैं। यह कई बार जान के लिए खतरा भी बन जाती है। ये 18 साल की उम्र में सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा बच्चे भी कमजोर होते हैं, जिनकी ग्रोथ नहीं होती है। इन्हें ग्रोथ रिटार्टेड बच्चे कहा जाता है। इसके अलावा एंटी पार्टम हैमरेज भी हो सकता है जिसमें यूटरस से ब्लीडिंग होती है। यह भी इस उम्र में कॉमन है।’Read full article

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Lockdown Stops Couples Who Took a Surrogate Route to Parenthood from Holding Newborns

Lockdown stops couples who took a surrogate route to parenthood from holding newborns.

For the last 12 years, Sheeba* and her husband have been trying to have a baby. Their dream came true last month when she had a baby through surrogacy, but life has been more agonising for the couple. The couple is among the many who are unable to see their babies delivered by surrogate mothers since the country went into lockdown on March 24. In India, 5,000 to 10,000 babies are born through surrogacy every year.

“They had come down from Dubai to Kanyakumari and planned to come to Chennai a few days before the delivery,” says Dr Geetha Haripriya, fertility expert and chairperson of Prashanth Hospital. The surrogate was due to deliver by March-end. “Sheeba’s mother fell ill and the surrogate went into labour on March 17. By the time Sheeba’s mother recovered, the lockdown was announced. We’ve sent them photographs of the baby. We give them daily updates about the baby’s health,” said the doctor.

Dr. Shivani Sachdev Gour, fertility expert and founder-director of SCI IVF Hospital in New Delhi, says that four babies were born through surrogacy at the centre in the past two weeks. “While two couples were able to come and get the children as they live in Delhi, two others have not yet seen their babies,” says Dr Sachdev. “One of the couples is from UP and have had a girl after trying for 14 years. The other, from Rajasthan, has had a boy. Though we gave them letters from the hospital, they are unable to come as the areas they live in have been sealed off.”

Read full article: https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/chennai-lockdown-stops-couples-who-took-surrogate-route-to-parenthood-from-holding-newborns/articleshow/75132224.cms

Coronavirus: how pregnant women can take care of themselves during the COVID crisis

The numbers of SARS-CoV-2 infected cases are soaring in India. While the rest of us move into unlock mode, millions of pregnant women in the country are still in an extended lockdown.

As per UNICEF statistics, India faces the world’s largest burden of COVID-19 pregnancies as 20.1 million births are expected since the COVID-19 pandemic was declared. This is more than China, which comes second to India, with 13 million births expected. A much-neglected aspect of the COVID-19 pandemic is the psychological stress during pregnancy and its risk on the development of the baby (neurodevelopmental effects on the offspring – published in Journal of Psychosomatic Obstetrics and Gynaecology in May 2020).

Coronavirus: how pregnant women can take care of themselves during the COVID crisis. Read more at https://newsable.asianetnews.com/india/coronavirus-how-pregnant-women-can-take-care-of-themselves-during-the-covid-crisis-qbt3ub

COVID Free Fertility Treatment | COVID19 Free IUI

Dr. Shivani Sachdev Gour explaining about SCI IVF Centre services: How we provided COVID-19 free fertility treatment and COVID free IUI. https://youtu.be/niv0BQHgBI0

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Dr. Shivani Sachdev Gour was Live from Ultrasound Room: USG in COVID_19 some perspectives and precautions

Dr. Shivani Sachdev Gour was Live from Ultrasound Room: USG in Covid_19 some perspectives and precautions. https://www.youtube.com/watch?v=_fD-dj4lofQ

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Anaesthesia Surgical Procedures in COVID19 for safety precautions | Dr Shivani Sachdev Gour | Dr Rahul

Anaesthesia Or Anesthesia Surgical Procedures in COVID19 for safety precautions | Dr. Shivani Sachdev Gour | Dr. Rahul

Modifications due to covid19 in surgical procedures for safety precautions by Dr. Shivani Sachdev Gour and Dr. Rahul at SCI International Hospital

Tips to surgical procedures for safety precautions due to covid19: Modifications due to covid19 in surgical procedures for safety precautions.

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Dr Shivani Sachdev Gour Explaining about COVID19 – Safety and Precautions in SCI IVF Centre in Noida

Dr. Shivani Sachdev Gour Explaining about COVID19 – Safety and Precautions in SCI IVF Centre in Noida

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Safe Motherhood in COVID 19 and its Medicolegal considerations Panel discussion

Pregnant women do not appear more likely to contract the infection than the general population. However, pregnancy itself alters the body’s immune system and response to viral infections in general, which can occasionally be related to more severe symptoms and this will be the same for COVID-19.

Reported cases of COVID-19 pneumonia in pregnancy are milder and with good recovery.

Pregnant women with heart disease are at the highest risk (congenital or acquired).